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राज्यपाल की मंजूरी के बाद पंजाब सरकार का बड़ा धार्मिक सुरक्षा कानून

Satyakhabarindia

पंजाब में धार्मिक आस्था की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने मंजूरी दे दी है। इस कानून के लागू होने के बाद अब गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले दोषियों को उम्रकैद तक की सजा दी जा सकेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक और सख्त कदम बताया है, जो धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा में पेश हुआ था बैसाखी के अवसर पर अहम विधेयक

यह विधेयक बैसाखी के पावन अवसर पर पंजाब विधानसभा में पेश किया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने इसे सदन में प्रस्तुत करते हुए कहा था कि गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता की रक्षा के लिए सख्त कानून जरूरी है। सरकार का मानना है कि बीते वर्षों में हुई बेअदबी की घटनाओं ने समाज में गहरी संवेदनाएं पैदा की हैं, इसलिए अब एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना आवश्यक हो गया था ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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बेअदबी को गैर-जमानती अपराध घोषित, सख्त जांच व्यवस्था लागू

नए कानून के तहत बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) घोषित किया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट तुरंत कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी ही करेंगे। इसके अलावा, अपराधियों के लिए 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। यदि यह अपराध साजिश के तहत किया गया हो तो सजा और भी कठोर हो सकती है।

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धार्मिक मर्यादा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रावधान शामिल

संशोधन के तहत कानून में धार्मिक ग्रंथ की परिभाषा और सुरक्षा व्यवस्था को और स्पष्ट किया गया है। अब गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की छपाई, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से ही किया जा सकेगा। साथ ही संरक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे स्वरूपों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करें। बेअदबी की परिभाषा में अब भौतिक, मौखिक, प्रतीकात्मक और डिजिटल माध्यम से की गई किसी भी प्रकार की अवमानना को शामिल किया गया है।

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